
एक चेहरा देखा है गुलिस्तां में,
मुस्कुराता हुआ आया है,
ख़ुशी की लहर अपने संग
और अमन का सन्देश लाया है.
बिक गयी अपनी ये जमीर
दुसरो के हाथो से,
नहीं कोई है जो अपना,
इसे छुडाये सैतानो से.
इसलिए वतन के रखवालो के,
शुक्रिया अदा करते है हम,
जिसने वतन पर जान देना,
एक हक़ अपना कहा है.
बदल देंगे जरे जरे दुश्मनों के,
और शांति का पैगाम भी देंगे,
न हथियार न बम न बारूद से,
सत्य अहिंसा से ही हम उन्हें जीत लेंगे.
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