झूठ से सना जिंदगी, झूठ से बना जिंदगी,
जिंदगी है पापियों का, झूठ से घना जिंदगी|
कीमत कितनी जिंदगी की, पापियों से भरा हुआ,
कोई अब काम न होता, झूठ के भी सिवा,
राह में चलते कभी, भेट होती झूठ से,
पेकेट में नोट होता और पहने सूट से,
कार्य करवाने को हम, झूठ से मजबूर है,
मज़बूरी को झूठ कहें, या झूठ से जिंदगी है,
चार दिन की जिंदगी, झूठ में ही बीत गयी,
जिंदगी की यही सच्चाई, झूठ पर ही टिकी|
झूठ से सना जिंदगी, झूठ से बना जिंदगी,
जिंदगी है पापियों का, झूठ से घना जिंदगी|
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