Monday, July 25, 2011

तक़दीर का खेल

इस दुनिया में तक़दीर का खेल बड़ा निराला है,
कंही सुखा तो कंही भरा हुआ प्याला है,
कंही आदमी मस्ती में सोता है,
तो कंही आदमी भूखे नंगे बदन रोता है,

तो कंही दिन का उजाला रात से अधिक काला है,
तो कंही रात को ही दिन बना डाला है,
इस दुनिया में तक़दीर का खेल बड़ा निराला है,
कंही सुखा तो कंही भरा हुआ प्याला है.

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