Thursday, July 28, 2011

आज के दिन अकेला लग रहा मन है


आज के दिन अकेला लग रहा मन है,
न कोई साथी ना कोई संग है,
दिल है खाली न कोई उमंग है,
आज के दिन अकेला लग रहा मन है।

कल हमारे संग दोस्तों का साथ था,
उनके साथ बिताया हर वह याद था,
पर आज हमारे दिल में गम ही गम है,
आज के दिन अकेला लग रहा मन है।

मस्ती के क्षणों को मैं याद करता हूँ,
वह क्षण लौट है यह फ़रियाद करता हूँ,
पर दिल है खोजता हर वह फन है,
आज के दिन अकेला लग रहा मन है,

प्यासों को प्यास इतनी सताती है,
जैसे कौओ की प्यासी कहानी याद आती है,
पर दिल है की भूलता नहीं यह क्षण है,
आज के दिन अकेला लग रहा मन है।

इस क्षण को मैं जीवन में ढाल चूका हूँ,
अब न कोई दोस्त बनाऊंगा यह साध चूका हूँ,
पर दिल है खोजता हर वक़्त नया कण है,
आज के दिन अकेला लग रहा मन है,

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