इतने दिनों से जिसने साथ निभाया था,
जिसने हमको अपने दिल में बसाया था,
उसके बिना मेरा मन गा नहीं सकता,
यूँ ही किसी को भुलाया जा नही सकता।
अब उसके लिए सदा फ़रियाद करता हूँ,
रहे सदा याद यह बात करता हूँ,
इसके अलावा मेरे मन को दूसरा भा नही सकता,
यूँ ही किसी को भुलाया जा नही सकता ।
रूठा है हमसे, हमसे क्या भूल हुई,
इस तरह अपने दिल की बत्ती गुल हुई,
अपने मन की बात समझाया जा नही सकता,
यूँ ही किसी को भुलाया जा नही सकता।
भूल जाना ही सबसे बेहतर बात होगी,
क्योंकी उसे भी जिंदगी जीने की चाह होगी,
सोच कर मन कहता, यह सोचा जा नही सकता,
यूँ ही किसी को भुलाया जा नही सकता।
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