Saturday, July 16, 2011

कवि बनने की अभिलाषा


कवियों के तरह तरह की कविता,
देख हमारे मन में,
मैं भी कभी सोचता हूँ
की कविता लिख डालूँ ।

पर जब मैं लिखने बैठा,
उठे मन में हजारो ख्याल,
तब मैंने फिर यह सोचा,
अच्छी अच्छी बातो को रखकर
एक नई कविता लिख डालूँ ।

शुरू किया मैं पहली पंक्ति
दूसरी पंक्ति में अटक गया,
मन को देख देख कर
दूसरी पंक्ति भी लिख डाला ।

कुछ इसी तरह कुछ उसी तरह
बनता गया उलझता गया,
अंत में मैंने कविता,
कवियों की तरह लिख डाला ।

No comments:

Post a Comment