Saturday, July 30, 2011

परेशान आदमी

आज की रात इतना सुनसान सा क्यों है?
हर वक़्त आदमी परेशान सा क्यों है?
मुश्किलों में आदमी दौड़ता रहता है,
दिल में उमंग लाना गुनाह सा क्यूँ है,
आज की रात इतना सुनसान सा क्यों है।

हम भी चले है उसी डगर पर,
जिस डगर पर हर आदमी चलते है,
रास्ते में भटक गए, हर रास्ता अंजान सा क्यों है,
आज की रात इतना सुनसान सा क्यों है,
हर वक्त आदमी परेशान सा क्यों है।

कुछ करो तो दिल से आती आवाज़ सी क्यों है,
आदमी अकेला है दिल मना करता क्यों है,
सच यही है की , डर की राह पर हैं,
आज की रात इतना सुनसान सा क्यों है।
हर वक्त आदमी परेशान सा क्यों है।

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