Sunday, July 17, 2011

काश! ये पेट ना होता



काश! ये पेट ना होता,
पापों का यह ढेर ना होता,
न होता यहाँ कलह-कलाप
न होता यहाँ विरह-विवाद
होती तो सिर्फ सच्चाई होती,
तो देश में खुशहाली होती,
पेट के कारण बनता बिगड़ता
पेट के कारण ही विवाद सुलझता,
होती घर में सुख और शांति,
तब ना होता दुसरो की बर्बादी,
इसीलिए तो रुपेश कहता है,
काश ये पेट ना होता,
पापों का यह ढेर ना होता.

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