बस इन फूलों की पत्तियों को देखो,
कितनी शांत सी प्रतीत होती है,
बेसक हमसे कुछ न कहती है,
पर इनके अन्दर भी समंदर भरा है,
खुद को न्योछवर करने वाली
एक मात्र उसकी पीड़ा है,
सुन्दर दिखने वाले फूल को बनाते है वो,
दिन रात उसकी सुन्दरता बढ़ाते है वो,
फिर भी दुःख इस बात की है उसे,
इतनी प्रयास का फल ना मिलता उसे,
कोई आकर उस अनुपम सुन्दरता को,
अपने कठोर हाथों से निर्मल कोमल फूल को,
तोड़ कर उसकी गरिमा घटाती है,
फिर भी इस फूलों की पत्तियों को देखो
कितनी शांत सी प्रतीत होती है।
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