Friday, September 2, 2011

तेरी याद

इस नादान दिल को समझाऊ कैसे, उसके बिन रह पता नहीं है,
आखें बंद करता हूँ रातो में, उसके बिना कुछ आता नहीं है,
दो बातें कर ले मुझसे, कंही तेरी तन्हाई ना मार डाले,
तेरे बिन ये दिल गुमसुम, ये दिल रह पता नहीं है।

अपनों से कब तक बातें करू, कब तक रातो को जागा करू,
तू ही बता दे ये खुदा कैसे उसे महसूस करू,
उसके दिल की गहराई में एक दिया जला दे,
वो मुझको देखे और मैं उसे देखा करू।

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