अक्सर डरता हूँ अपने अतीत से,
शायद ये न अलग कर दे अपने मित से,
आज ये बताना चाहता हूँ मैं सरेआम,
बहुत मुस्किल है निकलना इस जिंदगी से।
आदत से बहुत लाचार हूँ मैं,
अपने आप का गुनेहगार हूँ मैं,
मैं नहीं जानता कौन बचाएगा मुझे,
बस यही जानता हूँ बीमार हूँ मैं।
मदद की गुहार लगाई आवाज ना मिला,
दिल समझने वाला कोई दिलदार ना मिला,
बहुत अकेला लगता है, अकेलेपन को दूर करो कोई,
पर वेसा कोई मज़बूत दावेदार ना मिला।
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