Friday, September 2, 2011

जीने की राह

अंधरे में एक रौशनी की चमक,
दिल में जैसे सुरों के तार जगाती है,
लाख कठिन हो पाना मगर,
दिल में अकसर याद आती है,
पतली सी डगर से गुजरते हुए,
एक दिशा में चलते हुए,
मंजिल के करीब पहुच कर,
अकसर मंजिल ही खो जाती है,
शीतल छाँव में पेड़ के नीचे,
आराम करते हुए याद आती है,
बस जोश भर देने की कसक है,
मीठी सी दर्द की भनक है,
बस इसी तरह जिंदगी हमें,
जीने की राह बताती है।



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