ये अँधेरा किस ओर ले जा रही है मुझको,
अपनी कठिनाइओं से जला रही है मुझको,
अपनी भावनाओ को कैसे मैं कैद करूँ
यही यादें अन्दर ही अन्दर खाए जा रही है मुझको,
ये अँधेरा किस ओर ले जा रही है मुझको।
देख कर अनदेखा क्यूँ किया मुझको,
मांफी मांगी मैंने जो गलती हुई मुझसे,
दिल ने फिर भी एतबार किया है,
ना मानी है, वह मान जाएगी, ये विश्वाश किया है,
यही यादें अन्दर ही अन्दर खाए जा रही है मुझको,
ये अँधेरा किस ओर ले जा रही है मुझको।
दर्द की दिशा अब बदल गयी है मनो,
कोई तूफ़ान आने वाला है बस यही जानो,
हो कर भी वह मेरा हो ना सका,
यही दिल में दर्द है सबसे बड़ा जानो,
यही यादें अन्दर ही अन्दर खाए जा रही है मुझको,
ये अँधेरा किस ओर ले जा रही है मुझको।
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