मुझको यकिन है, तुम ही हो वो,
जिसे मैं हर कदम ढूंढ़ रहा हूँ,
अपने दिल की आवाज, अपने आप में सुन रहा हूँ,
केवल कहने से नहीं होता कोई अपना,
विश्वास भी बहुत बड़ी बात होती है,
अक्सर एक विश्वासघात ही दिल को,
सबसे बड़ी चोट देती है,
लेकिन जब दिल ही दिल की
बात समझने से इनकार करता है,
तो दिल कितना उदास होता है,
तो दिल कितना मायूस होता है,
फिर भी इस दिल को समझने वाला,
कोई नही है इस जहां में,
कोई समझ लेता इस दिल को तो इतनी
तकलीफ न होती, तकलीफ न होती.
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